संस्कार से मिलती है जीवन निर्माण की कला : चंद्रबलि शास्त्री

गढ़वा:हमारेदेशकेलोगोंकाचरित्रशिक्षावसंस्कारसेजुड़ाहै।शिक्षाहमेंजीवननिर्वाहकीकलासिखातीहै।वहींसंस्कारसेजीवननिर्माणकीसीखमिलतीहै।उक्तबातेंमिर्जापुर,उत्तरप्रदेशसेपधारेचंद्रबलिशास्त्रीनेकही।वेसदरप्रखंडकेसंग्रहेगांवमेंश्रीलक्ष्मीनारायणमहायज्ञसेपूर्ववातावरणनिर्माणकोलेकरआयोजितश्रीमछ्वागवतकथामेंबोलरहेथे।उन्होंनेकहाकिआजकेसमयमेंलोगोंकोशिक्षातोमिलरहीहैलेकिनशिक्षितलोगपारिवारिकवसामाजिकदायित्वोंकोपूरानहींकरपारहेहैं।ऐसेमेंसंस्कारयुक्तशिक्षाव्यवस्थाकरनेकीजरुरतहै।उन्होंनेकहाकियज्ञ,दानवतपमनुष्यकोपावनकरताहै।श्रीमछ्वागवतगीता,गर्गसंहिताआदिधर्मग्रंथोंमेंवर्णितप्रसंगोंकीचर्चाकरतेहुएउन्होंनेकहाकिदेश,धर्म,जातिकीमर्यादाकीरक्षाकेलिएमहापुरुषोंकाकाएकमंचपरआनाहीयज्ञहै।यज्ञकेधुएंसेदेवताओंकोतृप्तिवपितरोंकीआत्माकोशांतिमिलतीहै।यज्ञशब्दकीव्याख्याकरतेहुएउन्होंनेकहाकियऔरज्ञकेबीचकेनौअक्षरनवधाभक्तिहैं।उन्होंनेकहाकिसभीधर्मग्रंथोंमेंमातापिताकीसेवाकोसबसेबड़ाधर्मबतायागयाहै।प्रवचनमंचसेभारतकेमहानसंतत्रिदंडीस्वामीजीकेशिष्यअनंतविभूषितश्रीलक्ष्मीप्रपन्नजीयरस्वामीजीकेशिष्यश्रीविशिष्ठनारायणाचार्यनेभीश्रीमछ्वागवतकथाकेऋषभदेवप्रसंगवरामायणकेबालकांडमेंभगवानश्रीरामवउनकेभाइयोंकेनामकरणसंस्कारकेप्रसंगकाविशदवर्णनकिया।बतातेचलेंकिसंग्रहेगांवमेंआगामी4फरवरीसेश्रीलक्ष्मीनारायणमहायज्ञकाआयोजनश्रीवशिष्ठनारायणाचार्यकीदेखरेखमेंआयोजितकियाजानाहै।यज्ञसेपूर्वनियमितरुपसेप्रवचनआयोजितकिएजानेसेआसपासकेगांवोंमेंभीभक्तिमयवातावरणबनगयाहै।मौकेपरमहायज्ञकमेटीकेविध्याचलप्रसादसिन्हा,गोपालप्रसादसिन्हा,लक्ष्मणपासवान,बीरबलविश्वकर्मा,घनश्यामठाकुर,गिरजाशंकरतिवारी,रंजीतकुमारसिन्हा,राहुलवर्मासमेतकईअन्यलोगउपस्थितथ्