परिषदीय विद्यालय के प्रति बदल दी सोच

नीतेशसिंह,बाबूसराय(भदोही):

मनमेंकुछअलगकरनेकीचाहतलेकरएकशिक्षकनेजबहौसलादिखायातोपरिषदीयविद्यालयकीतस्वीरबदलतीदिखरहीहै।जिनविद्यालयोंकोलोगकोसतेनहींथकतेथेऔरअपनेबच्चोंकोवहांभेजनानहींचाहतेथे।उसीप्राथमिकस्कूलकेप्रतिलोगोंकीसोचबदलगईहै।बातहोरहीहैऔराईब्लाकक्षेत्रकेप्राथमिकविद्यालयशिवरामपुरकी।

विद्यालयकेप्रतिलोगोंकेनजरिएमेंबदलावकेपीछेहैंप्रधानाध्यापकश्रीकांतपटेल।उन्होंनेबच्चोंकोस्मार्टशिक्षामिले,इसेलेकरअपनेनिजीखर्चसेस्मार्टक्लासचलाई।परिषदीयस्कूलोंकीशिक्षाव्यवस्थासेलेकरनिश्शुल्कयूनिफार्म,मध्याह्नभोजनआदिकेनामपरमनमानीकीशिकायतलेकरलोगअफसरोंतककेयहांपहुंचजारहेहैं।ऐसेमेंश्रीकांतपटेलनेअपनेप्रयासोंसेबेसिकशिक्षाकोनयाआयामदेनेकीकोशिशमेंलगेहैं।वर्ष2009सेविद्यालयमेंमिलीतैनातीकेबादसेजहांनवाचारोंसेबच्चोंकोलाभान्वितकररहेहैंतोअपनेनिजीखर्चवसहयोगीशिक्षकोंकेसहयोगसेकरीब60,000रुपयेखर्चकरस्मार्टक्लासकीव्यवस्थाकरडालीहै।कमतरनदिखेंबच्चे

अपनेनिजीखर्चसेपरिषदीयविद्यालयमेंस्मार्टक्लासस्थापितकरनेकेबारेमेंउनकाकहनारहाकिविद्यालयकेपढ़करनिकलनेवालेबच्चेकहींसेकांवेंटवनर्सरीविद्यालयकेबच्चोंसेकमतरनरहें।वहभीकहींजानेपरपूरेशानसेकहसकेंकीहमभीदेशकेभविष्यहैं।इसकेपीछेउनकामकसदबसइतनाहीहै।मिलचुकाहैसर्वाधिकउपस्थितकासम्मान

प्राथमिकविद्यालयशिवरामपुरमेंबच्चोंकीउपस्थितिकाफीबेहतररहतीहै।उपस्थितिकोलेकरउन्हेंवर्ष1916मेंजिलेमेंबच्चोंकी98फीसदउपस्थितिकेलिएतत्कालीनबीएसएकीओरसेसम्मानितकियाजाचुकाहै।मौजूदासमयमेंबंदचलरहेविद्यालयकेचलतेवहखुदवअन्यशिक्षकआनलाइनशिक्षाकेजरिएबच्चोंकोसपोर्टदेनेमेंजुटेहैं।