निभाया वादा: कहा था पांच को आऊंगा...आए भी पर तिरंगे में लिपटकर, आखिरी खत आज भी देता है प्रेरणा

आरएसपुरा, दलजीतसिंह। श्रीलंकामेंआतंकवादकेसफाएकेलिएवर्ष1988मेंजबभारतीयसेनाभेजीगईतोजम्मूकेआरएसपुराक्षेत्रकेबाजेचकगांवकेनायकदेवराजशर्माभीगएथे।ऑपरेशनकेदौरानउनकेपांवमेंगोलीलगगई।वहांसेलौटेतोपांवकाजख्मतोठीकहोगया,लेकिनदर्दनहींगया।

वर्ष1999मेंजबदर्दबढ़ातोउन्होंनेघरमेंखतलिखाकिछुट्टीलेकरपांचजुलाईकोघरआरहाहूं।तभीकारगिलकायुद्धशुरूहोगया।उनकेलिएटाइगरहिलकीचढ़ाईचढऩाकठिनथा।दर्दकेबावजूदउन्होंनेघरजानेकाकार्यक्रमरदकरदियाऔरदेशकीरक्षाकेलिएस्वेच्छासेटाइगरहिलपरजानेकेलिएअपनानामशामिलकरवाया।

चूंकिदेवराजएमएमजी(मीडियममशीनगन)चलानेमेंमहारतरखतेथे।इसलिएउन्हेंघरजानागंवारानहींथा।कारगिलमेंपांचजुलाई,1999कोदुश्मनसेलड़तेहुएउन्होंनेशहादतपाई।उनकापार्थिवशरीरउसीदिनघरपहुंचा।शहीदनेदेशकेप्रतिअपनाफर्जभीनिभायाऔरघरपहुंचनेकावादाभी।

बार-बारपढ़तीहूंआखिरीखत....

कारगिलयुद्धहुएबीससालगुजरचुकेहैं।शहीददेवराजशर्माकेपरिवारनेउनकीयादोंकोआजभीअपनेदिलोंमेंजिंदारखाहै।उनकीहरचीजकोपरिवारधरोहरकीतरहसंभालेहुएहै।शहीददेवराजकीपत्नीनिर्मालादेवीनेनमआंखोंसेबतायाकिशहादतसेकुछदिनपूर्वउन्होंनेखतलिखाथाकिपांचजुलाईकोघरपहुंचजाऊंगा।वहआएभी,परतिरंगेमेंलिपटकर।निर्मलादेवीनेबतायाकिउनकाअंतिमखतआजभीमेरेपासहै।उसेमैंबार-बारपढ़तीहूं।

पिताकेपर्ससेमिले10केनोटपरलिखा'पापाजीÓ:

शहीददेवराजकाएकबेटावदोबेटियांहैं।पिताकीशहादतकेसमयवेकाफीछोटेथे।अबसभीकीशादीहोचुकीहै।बेटेअमितकुमारनेकहाकिउन्हेंगर्वहैकिवेकारगिलशहीदनायकदेवराजकेपुत्रहैं।वहसेनामेंभर्तीतोनहींहोसका,लेकिनपिताकेबताएपदचिन्होंपरचलरहेहैं।पिताकेशहादतकेसमयउनकेपर्समेंमिलेदसरुपयेकेनोटकोदिखातेहुएअमितनेबतायाकिवेउनकीआखिरनिशानीकोहमेशाअपनेसाथरखतेहैं।नोटपरउन्होंने'पापाजीÓलिखकरउसेलेमीनेटकरवारखाहै।