लोकपाल को मिलने वाली शिकायतें काफी कम हुयी : सरकार

नयीदिल्ली,पांचअगस्त(भाषा)कार्मिक,लोकशिकायततथाप्रधानमंत्रीकार्यालयमेंराज्यमंत्रीजितेंद्रसिंहनेबृहस्पतिवारकोकहाकिपिछलेकुछवर्षोंकेदौरानलोकपालकोमिलनेवालीशिकायतोंकीसंख्यामेंखासीकमीआयीहै‘‘जोनरेंद्रमोदीसरकारकेबारेमेंदर्शाताहैकिशिकायतकरनेकेलिएबहुतकुछनहींहै।’’सिंहनेराज्यसभामेंप्रश्नकालकेदौरानपूरकसवालोंकेजवाबमेंयहजानकारीदी।उन्होंनेकहाकि2019-20मेंभ्रष्टाचारविरोधीनिकायलोकपालको1,427शिकायतेंमिलीथींजो2020-21मेंघटकरकेवल110औरचालूवर्षमें12रहगयीं।मंत्रीनेकहाकिसभीकेलिएयहजाननामहत्वपूर्णहैकिपहलेवर्षमेंलोकपालकेपास1,000सेअधिकशिकायतेंथीं,लेकिनअगलेहीवर्षयहघटकरलगभग100होगई।उन्होंनेकहाकि2019-20में1,427और2020-21में110शिकायतेंथींतथाचालूवर्षमेंअबतकइनकीसंख्याकेवल12है।लोकपालकेप्रदर्शनकोलेकरपूछेगएसवालकेजवाबमेंसिंहनेकहाकिसीधेराष्ट्रपतिकोअपनीरिपोर्टपेशकरताहै।लोकपालमेंमौजूदारिक्तियोंकेबारेमेंसिंहनेकहा,"(नियुक्ति)प्रक्रियाचलरहीहै।हमनेपहलेहीलोकपालसमितिकागठनकरदियाहै।"उन्होंनेकहाकिप्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदीखुदभ्रष्टाचारकेखिलाफजीरोटॉलरेंस(कतईबर्दाश्तनहींकरने)केलिएप्रतिबद्धहैंऔरउसीप्रतिबद्धताकेतहतलोकपालकीस्थापनाभीहुई।उन्होंनेकहाकिपहलीबारलोकपालकीमांग1963मेंकीगईथी।फिरअलग-अलगसरकारोंद्वारासंसदमेंकमसेकम10बारएकविधेयकपेशकियागया,चाहेइच्छाशक्तिकीकमीहोयाआधा-अधूराप्रयास।आखिरकार2014कीशुरुआतमेंसंप्रगसरकारअपनेकार्यकालकेअंतिमचरणमेंदबावमेंएकविधेयकलेकरआयीथीजिसमेंकईकमियांथीं।उसकेबादविधेयककोसंशोधितरूपमेंलायागया।सिंहनेकहाकिअब,इसकेअध्यक्षऔरदोन्यायिकसदस्यहैं।एकन्यायिकसदस्यकीकोविडसेमृत्युहोगई।लोकपालमेंरिक्तियोंकीसंख्याकेबारेमेंउन्होंनेकहाकिलोकपालऔरलोकायुक्तकानून,2013कीधारा11और12केतहतकिएगएप्रावधानसहितलोकपालकीसंस्थाकीखातिरआवश्यकस्टाफस्वीकृतकिएगएहैं।उनसेसवालकियागयाथाकिक्यालोकपालनेलोकसेवकद्वाराकथितरूपसेकिएगएकिसीभीतरहकेअपराधमेंप्राथमिकजांचऔरअभियोजनकेलिएलोकपालऔरलोकायुक्तअधिनियम,2013केअंतर्गतजांचप्रकोष्ठऔरअभियोजनप्रकोष्ठगठितकियाहै।सिंहनेएकअन्यसवालकेजवाबमेंकहाकिसरकारमेंनियुक्तियांऔरस्थानांतरणमौजूदानियमोंऔरदिशानिर्देशोंकेअनुसारकिएजातेहैं।उन्होंनेकहाकिसरकारीकर्मचारियोंकेस्थानांतरणवतैनातीकेसंबंधमेंकार्मिकऔरप्रशिक्षणविभाग(डीओपीटी)द्वाराजारीनिर्देशोंकेअनुसारसंबंधितमंत्रालयोंवविभागोंकोअपनीस्थानांतरणनीतिको‘पब्लिकडोमेन’(सार्वजनिक)मेंउपलब्धकरानाभीजरूरीहै।