जीवन में मौत का आगमन निश्चित है : जैन संत

संवादसूत्र,रतिया:इससंसारमेंसबकुछबातेंनिश्चितहैं,जैसेशीतकालकीविदाई,अमावस्याकेबादपूर्णमासीऔरदिनकेबादरातकाक्रमनिश्चितहै,ठीकवैसेहीजीवनमेंमौतकाआगमनभीनिश्चितहै।यहप्रवचनजैनसंतसुमतिमुनिजीमहाराज,सत्यप्रकाशजीमहाराजवसमर्थमुनिजीमहाराजनेजैनस्थानकमेंउपस्थितश्रद्धालुओंकोकहे।उन्होंनेकहाकिमौतकेआगमनकाकोईभरोसानहींहै,वहघड़ीकभीभीआसकतीहैइसलिएचलनेकीपूरीतैयारीरखें।जैनसंतोंनेकहाकिजिसप्रकारदियासिलाईमेंकईतीलियांहोतीहैं।लेकिनकोईभीयहनहींबतासकताकिइसतीलीकानंबरकिसतीलीकेबादलगेगा।उन्होंनेकहाकियहजिदगानीपत्थरपरखींचीलकीरकेसमानहै।इसलिएहजारकामछोड़करधर्माचरणकरलेना,उसप्रभुकीशरणमेंजाकरभक्तिकरलेना,यहीलोकवपरलोकमेंकामआएगी।संतोंनेकहाकिबीमारीकीखिड़कीहोयाबुढ़ापेकादरवाजा,प्रियकीमौतकारोशनदानहोअथवादुर्घटनाकागुप्तद्वार,मृत्युहरस्थानसेझांकतीहै।उन्होंनेकहाकिहमसबकोयादरखनाचाहिएकिसबकीमौतएकसप्ताहकेअंदरहीहोगीक्योंकिसप्ताहकेसातदिनहीहोतेहैं,आठवांदिननहींआता।उन्होंनेकहाकिधर्मतोपारसपत्थरहैजोलोहेकोसोनाबनाताहैतथाधर्महीपत्थरकोमूर्तिबनासकताहै।

डीएवीस्कूलमेंश्रद्धाभावसेमनाईमहात्माहंसराजजीकीजयंती

संवादसहयोगी,टोहाना:डीएवीपब्लिकस्कूलमेंमहात्माहंसराजकीजयंतीहर्षोल्लासएवंश्रद्धाभावसेमनाईगई।इसअवसरपरप्रिसिपलडा.मालाउपाध्यायसहितसमस्तस्टाफसदस्योंनेहवनयज्ञमेंभागलेकरआहुतियांप्रदानकी।

इसअवसरपरआशी,जयश्री,केशवऔरदिव्यमनेभजनोंवभाषणकेमाध्यमसेमहात्माहंसराजजीकागुणगानकियाऔरउनकेद्वाराकियेगयेशिक्षाकेक्षेत्रमेंयोगदानपरप्रकाशडाला।स्कूलकीप्राचार्यडा.मालाउपाध्यायनेसंदेशमेंमहात्माहंसराजजीकेव्यक्तित्वएवंकृतित्वपरप्रकाशडालतेहुएबतायाकिमहात्माहंसराजजैसेमहानतपस्वीआदर्शशिक्षकऔरतपोनिष्ठाकेतपकाफलहैकिदेशऔरविदेशमेंडीएवीविद्यालयऔरमहाविद्यालयगुणवत्तापरकशिक्षाप्रदानकररहेंहैं।

उन्होंनेबतायाकिशिक्षाकोगतिप्रदानकरनेकेलिएमहात्माहंसराजजीकायोगदानअविस्मरणीयहै।उन्होंनेडीएवीशिक्षणसंस्थानोंकेअवैतनिकप्राचार्यपदपरकार्यकरतेहुएअपनाजीवनसमाजहितकेलिएसमर्पितकरदिया।