हिंदी रंगमंच दिवस : आज के ही दिन पहले हिंदी नाटक का मंचन हुआ था वाराणसी में

वाराणसी,जेएनएन।तीनअप्रैल1868कीशाम।पूरेबनारसमेंगहमागहमीकामाहौल।शहरकेबड़े-बड़ेसेठ,साहित्यकार,कलाकार,बुद्धिजीवी,देशी-विदेसीहाकिम,सैन्यअधिकारी,पहुंचवालेलोग,पंडित,विद्वानसभीकीसवारियां,बग्घियां,इक्के-तांगेआदिकैंटोनमेंटकेअसेंबलीरूमकीओरचलेजारहेथे।सभीमेंउत्सुकताथी,महाराजबनारसद्वाराआयोजितनयातमाशाथियेटरदेखनेकी।उसीदिनभारतमेंपहलीबारशीतलाप्रसादत्रिपाठीकृतहिंदीनाटकजानकीमंगलकामंचनहुआ।इसीआधारपरबादमेंतीनअप्रैलकोहिंदीरंगमंचदिवसघोषितकियागया।

जून1967मेंआचार्यरामचन्द्रशुक्लनेहिंदीसाहित्यकाइतिहासमेंपहलीबारइसनाटककेमंचनको प्रमाणिकतौरपरपुष्टकिया।इंग्लैंडकेएलिनइंडियनमेलकेआठमई1868केअंकमेंभीउसनाटककेमंचनकीजानकारीभीप्रकाशितहुईथी।इसीआधारपरपहलीबारशरदनागरनेहीहिन्दीरंगमंचदिवसकीघोषणातीनअप्रैलकोकीथी।

हिंदी रंगमंचकीस्थापनामेंकाशीनरेशकीथीमहतीभूमिका

हिंदीरंगमंचकीस्थापनामेंसबसेमहत्वपूर्णभूमिकातत्कालीनकाशीनरेशईश्वरीनारायणसिंहनेनिभाई।उनदिनोंनाट्यक्षेत्रमेंब्रितानीमाडलज्यादाप्रभावीथे।काशीकीपारंपरिकता,आधुनिकताकेदबावसेबचनेकीकोशिशमेंबीचकारास्ताखोजरहीथी।तबआगेआएकाशीकेमहाराज ईश्वरीप्रसादनारायणसिंह।उन्होंनेअपनेदरबारीकविगणेशकोइसपरकामकरनेकोकहा।गणेशनेजोनाटकलिखावहपारंपरिकऔरछंदबद्धथा।महाराजसंतुष्टनहींहुए।वहऐसीपरंपराशुरूकरनाचाहतेथेजोअंग्रेजीनाट्यप्रस्तुतिकामुकाबलाकरसके।तबउन्होंनेयहजिम्मेदारीसौंपीपंडितशीतलाप्रसादत्रिपाठीको।उन्होंनेशास्त्रीयसंस्कृतनाटक,पारंपरिकरामलीलाऔरयूरोपीयनाट््यतत्वोंकोमिलाकरजानकीमंगलतैयारकिया।बाबूउश्वर्यनारायणप्रसादसिंहनेरामलीलाकेकलाकारोंसंगरिहर्सलशुरूकिया।प्रस्तुतिकास्थानचुनागयाकैंटोनमेंटकाअसेंबलीरूम्सएंडथियेटर।बादमेंइसेरायलथिएटरकेनामसेभीजानागया।

आनन-फाननभारतेंदुनेनिभाईलक्ष्मणकीभूमिका

प्रस्तुतिकेऐनपूर्वलक्ष्मणबननेवालालड़काबीमारपड़गया।नाटकस्थगितहोनेकीनौबतआगई।तभी18वर्षीययुवाहरिश्चंद्रवहांपहुृंचे।उन्होंनेलक्ष्मणकीभूमिकाकरनेकोकहा।महाराजनेसंवादयादहोनाअसंभवबतायातोउन्होंनेघंटेभरमेंयादकरसुनादिया।फिरनाटकखेलागया।भारतेन्दुकेमनमेंहिंदीनाटकलेखनऔरउसकेअभिनयकाउत्साहजगाऔरउन्होंनेखुदनाटकलिखनाशुरूकरदिया।अपनानाट्यदलभीबनाया।जिसमेंराधाकृष्णदास,रविदत्तशुक्ल,दामोदरशास्त्री,पं.चिंतामणि,पं.माणिकलालजोशीआदिथे।उन्होंनेवाराणसीऔरबलियाकेददरीमेलेमेंनाट्यप्रस्तुतियांदीं।इसकेबादतोकाशीमेंनाटककरनेकेलिएनाट्यसंस्थाओंकाबननाआरंभहोगया।