दुनिया ने भारत की परिवार व्यवस्था और मूल्यों को माना: उपराष्ट्रपति

नयीदिल्ली,15नवंबर(भाषा)उपराष्ट्रपतिवेंकैयानायडूनेशुक्रवारकोकहाकिदुनियाभरकेलोगोंनेयहमानाहैकिसमाज,अन्यचिंताओंएवंआंतरिकशांतिकेलियेभारतकीपरिवारव्यवस्थासौहार्दकीदिशामेंमार्गदिखातीहै।यहांइंदिरागांधीनेशनलसेंटरफॉरदीआर्ट्स(आईजीएनसीए)मेंआयोजितएकअंतरराष्ट्रीयकार्यक्रमकाउद्घाटनकरतेहुएउन्होंनेसमाजमेंमाताओंकीभूमिकाकोसराहाऔरकहाकिसभीधर्मोंमेंमाताओंकास्थानऊंचाहैऔरउन्हेंश्रद्धाकेभावसेदेखाजाताहै।सम्मेलनमेंनायडूने‘वसुधैवकुटुम्बकम-परिवारव्यवस्थाऔरमाताकीभूमिका’परकहा,‘‘दुनियाभरकेधर्मोंमेंमहिलाओंऔरमाताओंकाविशेषमहत्वहैऔरवेपरिवारएवंमानवताकीकेंद्रबिंदुहैं।’’हिंदूधर्मसेलेकर,ईसाईधर्मऔरइस्लाममेंमाताओंकेमहत्वकोरेखांकितकरतेहुएउपराष्ट्रपतिनेकहाकिहमारेसमाजमेंमहिलाओंकोनसिर्फबराबरीकादर्जामिलाहैबल्किवेपुरुषोंसेभीश्रेष्ठहैंक्योंकिवेमानवताकीजननीहैं।उन्होंनेकहा,‘‘इस्लाममेंपैगम्बरमोहम्मदकामशहूरकथनहै-अलजन्नतोतहताअकदामअलउमहात(जन्नतमाताओंकेकदमोंकेनीचेहै)।’’उन्होंनेकहा,‘‘ऋगवेदकालमेंमातृशतात्मकभूमिकाकाबड़ामहत्वथा।ईसाईधर्ममेंमातृत्वकोजीवनकाएकउच्चएवंअहमक्षणबतायागयाहै।’’नायडूनेसंस्कृतकाश्लोक‘‘जननिजन्मभूमिश्चस्वर्गादपिगरियसि’’काउल्लेखकरतेहुएकहाकिहिंदुत्वमेंमाताओंकास्थानस्वर्गसेभीऊपरहै।उन्होंनेकहाकिसाझाकरनेऔरदेखभालकाविचार‘वसुधैवकुटुम्बकम’(विश्वएकपरिवारहै)केदर्शनमेंनिहितहैऔरयह5,000सालपुरानीभारतीयसभ्यताकेटिकेरहनेऔरफलने-फूलनेकेपीछेप्रमुखकारकहै।