ध्यान से ही आती है मन में पवित्रता: गुरुवानंद बाबा

सहरसा।सौरबाजारकेरामपुरवार्डनंबर15मेंआयोजितसंतकागबाबाज्ञानमार्गकेदूसरेदिनमंगलवारकोप्रवचनदेतेहुएवर्तमानआचार्यगुरुवानंदबाबानेकहाकिमनहीमनुष्यकाप्रथमऔरप्रधानदुश्मनहै।पूरीदुनियाइसीमनऔरज्ञानकेबीचकीलड़ाईमेंझुलसरहीहै।मनविकारसेभराहैऔरज्ञानपवित्रहै।स्वभाविकअवस्थामेंमनुष्यमनसेचलताहै।विकृतमनरहनेकेकारणमनसेअशुभकर्महोताहै।मनुष्यदुखभोगनापसंदनहींकरतेहैं।प्रत्येकमानवकीइच्छासच्चासुखपानेकीहै।इसलिएप्रत्येकमनुष्यकोज्ञानप्राप्तकरनेकेलिएगुरुकरनापरमआवश्यकहै।उन्होंनेकहाकिगुरुसेयोगविद्याप्राप्तकरनित्ययोगकेमाध्यमसेलोगस्वयंकोसुखीकरलेताहै।लेकिनमनऔरज्ञानकेबीचकीलड़ाईमेंमनपरज्ञानकाविजयआवश्यकहै।तभीमनमेंपवित्रताआएगीऔरअंदरकेगलतविचारखत्महोगा।उन्होंनेकहाकिध्यानसेहीमनमेंपवित्रताआतीहै।संतकागबाबाकेवाणीकीचर्चाकरतेहुएउन्होंनेकहाकिसमयानुकूलभोजन,दवा,वस्त्रशारीरिकहिफाजततथामधुरवचनसेसेवाकरनाहीजीवितश्राद्धहैतथामृत्युपरांतपिडदान,जलतर्पणकरनामृतश्राद्धहैजोअव्यवहारिकहै।उन्होंनेकहाकिमूर्तिपूजाछोटीपूजाहैबड़ीपूजाध्यानहै।प्रत्येकमनुष्यकोध्यानकाज्ञानकिसीअच्छेगुरूसेप्राप्तकरनाचाहिएअन्यथामनुष्यअपनीमानवीयताकाबोधनहींकरसकताहैऔरउसेदुखभोगनापड़सकताहै।इसदौरानअरूणपंडित,विशेश्वरपंडित,अनिलकुमार,रामप्रवेशकुमार,विष्णुदेवकुमार,सदानंदपंडित,रामस्वरूपपंडितसमेतअन्यमौजूदथे।

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