बोल कड़ाकड़ सीताराम, जय सियाराम जय सियाराम..

कोथावां:चारोंतरफआस्थाकासैलाब।बोलकड़ाकड़सीताराम,जयसियारामजयसियारामकीगूंज।कोईपैदलनंगेपैरतोकोईसाइकिलपर,पुरुषोंकेसाथमहिलाएंभी।बच्चोंसेलेकरबुजुर्गऔरदिव्यांगभीपीछेनहीं।पौराणिकचौरासीकोसीपरिक्रमाशनिवारकोदूसरेपड़ावकोथावांपहुंची।भीड़अपारलेकिनअनुशासनकीडोरमेंबंधीचलरहीथी।जिसेजहांजगहमिलीपड़ावडाललियाऔरपूजापाठमेंलीनहोगया।

आनंदवआस्थामेंसराबोर84कोसीपरिक्रमाकाजिलेमेंदूसरापड़ावकोथावांमेंहै।हर्रैयासेसूरजकीकिरणकेसाथपरिक्रमादूसरेपड़ावकेलिएशनिवारकोरवानाहुई।सूरजकीकिरणकेसाथपरिक्रमामार्गपरश्रद्धालुओंकीभीड़हीभीड़होगई।कोथावांसेअतरौलीमार्गपरजिधरनजरउठाओश्रद्धालुहीश्रृद्दालुनजरआरहेथे।नबुजुर्गपीछेऔरनहीयुवा।महिलाओंकीभीअपारभीड़।कोईसाइकिलपरगृहस्थीलादेतोकोईट्रैक्टरऔरबैलगाड़ीपरसामानलेकरचलरहा।पुरुषहोयामहिलाएंमुंहमेंरामरामऔरसिरपरलकड़ियोंकाछोटासाबोझ।नगवांसेलेकरकोथावांतकचारोंतरफभीड़कारेलाहीरेलादिखरहाथा।कोथावांमेंदुकानोंकेबाहरसेलेकरमैदानऔरसड़ककेकिनारेपंडाललगे।शनिवारकोपूरादिनकोथावांकेचप्पेचप्पेपरसाधु-संतसेलेकरपरिक्रमामेंशामिलगृहस्थनजरआए।पूरादिनपूजन-भजनहुआऔरफिरशनिवारकीआधीरातबादसेहीपरिक्रमार्थीचौथेपड़ावगिरधरपुरउमरारीकेलिएरवानाहोगए।परिक्रमामेंदिखीभारतीयसंस्कृति

84कोसीपरिक्रमामेंप्राचीनभारतकीझलकऔरभारतीयसंस्कृतिदोनोंदिखी।हरकिसीमेंसेवाभाव।नकोईऊंचानकोईनीचा।जिसकेपासवाहनवहउसमेंसवारतोपैदलवालेभीपीछेनहीं।भजनकेसाथभोजनकीचितातोसड़ककिनारेलकड़ियांबीनकरचलतेऔरजिसेजहांठिकानामिलताआरामकरकोईमिट्टीकाचूल्हाबनाकरतोकोईजमीनपरहीखानाबनानेलगता।