भय की राजनीति उम्मीदों की राजनीति पर हावी न हो : मनमोहन सिंह

जयपुर,सातजुलाई:भाषा:पूर्वप्रधानमंत्रीमनमोहनसिंहनेकहाकिदेशकेलिएजरूरीहैकिभयकीराजनीतिउम्मीदोंकीराजनीतिपरहावीनहो।राजस्थानविधानसभामेंपंद्रहवींविधानसभाकेनिर्वाचितसदस्योंकेलिएआयोजितप्रबोधनकार्यक्रमकेसमापनसत्रकोसंबोधितकरतेहुएसिंहनेकहाकिविधायकोंकोलोगोंमेंआत्मविश्वासलानाचाहिए,ताकिवेखुशीसेरहसकें।उन्होंनेकहाकिकुछदिनपूर्वएकजाने-मानेशिक्षाविदनेइसबातकोइंगितकियाथाकिभयकीराजनीतिउम्मीदोंकीराजनीतिपरखतराबनसकतीहै।सिंहनेकहाकिभयकीराजनीतिउम्मीदोंकीराजनीतिपरहावीनहींहो,इसकेलियेजनताविधायकोंपरनिर्भररहतीहैऔरयहदेशकेलियेजरूरीहै।पूर्वप्रधानमंत्रीनेकहाकिप्रबोधनकार्यक्रमकेमाध्यमसेविधायकराज्यकेप्रतिअपनेसंसदीयदायित्वकोबेहतरतरीकेसेसमझसकेंगे।उन्होंनेकहाकिहरविधायककाप्रथमकर्तव्यहैकिवहअपनेविधानसभाक्षेत्रकेनिवासियोंऔरविधानसभाकेबीचकड़ीकेरूपमेंकामकरे।उसेविधायककोषकीराशिकासौप्रतिशतउपयोगकरअपनेविधानसभाक्षेत्रमेंआधारभूतसंरचना,स्कूल,चिकित्सालयनिर्माणजैसेकार्यकरानेचाहिए।सिंहनेविधायकोंसेकहा,‘‘आपइससमस्याकोभलीभांतिसमझतेहैं,इसलिएजनतामेंआत्मविश्वासलानाआपकीप्राथमिकताहोनीचाहिएताकिउनमेंयहविश्वासहोसकेकिआपकेकुशलनेतृत्वकेकारणवेलोगखुशहालीसेजीरहेहैं।’’उन्होंनेकहाकिवहभविष्यकोलेकरपूर्णतयाआश्वस्तहैं।सिंहनेकहाकिएकविधायककोविशेषतौरपरजबवहविपक्षमेंहोतबअन्यलोगोंकोसुननेकीआदतहोनीचाहिए।पूर्वप्रधानमंत्रीनेकहाकिउन्हेंबहुतदुखहोताहैजबकुछराज्योंकीविधानसभाओंमेंविधायकअभद्रव्यवहारकरतेहैं।उन्होंनेकहाकिलोकसभाऔरकईविधानसभाओंकीकार्यवाहीकाअबसीधाप्रसारणकियाजारहाहै।यहअफसोसकीबातहैकिकभी-कभीकुछविधायकऔरकुछसांसदसदनमेंअभद्रव्यवहारकरतेहैं।इससेमुझेबहुतदुखहोताहै।इसतरहकीघटनाओंसेयुवापीढ़ीमेंएकगलतसंदेशपहुंचताहै।सदनोंमेंतथ्यपरकऔरगुणवत्तापूर्णचर्चाहोनीचाहिए।सिंहनेकहाकिविश्वमेंसंसदीयलोकतंत्रकेबदलतेपरिदृश्यमेंराजस्थानएकअग्रणीप्रदेशकेरूपमेंपहचानाजाताहै।उन्होंनेअपनेदायित्वकेप्रभावीनिर्वहनकेलिएराज्यविधानसभाकेनवनिर्वाचितसदस्योंकोसंसदीयप्रक्रियाओं,कार्यप्रणालीएवंनियमोंकीगहनजानकारीरखनेकाआह्वानकिया।उन्होंनेकहाकिहरविधायकजनताकेप्रतिनिधिकेरूपमेंविधायीकार्यकासंरक्षकहैजिसेअपनीसंविधानप्रदत्तविधायी,वित्तीयएवंसंवैधानिकशक्तियोंकाजनसेवाकेलिएमानवीयपक्षकोध्यानमेंरखतेहुएउपयोगकरनाचाहिए।सरकारएवंप्रतिपक्षकोमिलकरसहमतिकेआधारपरअग्रसरहोनाचाहिए।पूर्वप्रधानमंत्रीनेकहाकिविधायकोंकोअपने-अपनेविधानसभाक्षेत्रोंकासमुचितविकासकरनेकेलिये'विधायकनिधि'कापूराउपयोगकरनाचाहिए।कैगकीएकरिपोर्टकेबारेमेंमीडियामेंआईखबरोंकाउल्लेखकरतेहुएसिंहनेकहाकिवर्ष2011से2016केदौरानविधायकोंकोआंवटित'विधायकनिधि'काबड़ाहिस्साउपयोगनहींकियागया।उन्होंनेकहाकि'विधायकनिधि’काउपयोगढांचागतविकास,स्कूल,अस्पतालकेनिर्माणकेलियेहोनाचाहिएताकिसंबंधितक्षेत्रोंमेंरहनेवालेअधिकतरलोगोंकोइसकाफायदामिलसके।सिंहनेसरकारीकार्यक्रमोंऔरयोजनाओंकोलागूकरनेमेंविधायकोंकेअधिकार,नियंत्रणऔरकार्योंकाभीउल्लेखकिया।उन्होंनेकहाकिसरकारऔरविपक्षकोराज्योंकीजरूरतोंपरखुलेतौरपरसोचनाचाहिएऔरउन्हेंराजनैतिकसंबंधताकोअलगरखतेहुएआपसकीसहयोगकीभावनासेकामकरनाचाहिए।इसअवसरपरमुख्यमंत्रीअशोकगहलोतनेकहाकिपूर्वप्रधानमंत्रीडॉ.मनमोहनसिंहनेवित्तमंत्रीरहतेहुएआजादीकेबादपहलीबारउदारीकरणकीशुरुआतकी,जिससेदेशकेविकासकीराहखुली।उन्होंनेकहाकिविकसितराष्ट्रभीजिससमयमंदीसेगुजररहेथे,उसदौरानपूर्वप्रधानमंत्रीकीअर्थनीतिकेकारणभारतमंदीकेदौरसेअछूतारहा।वर्ष2007मेंभारतकीजीडीपीदर9प्रतिशततकलानेकाश्रेयभीडॉ.सिंहकोहीहै।उन्होंनेकहाकिसंसदीयलोकतंत्रमेंडॉ.सिंहकेदीर्घअनुभवोंकालाभसभीविधायकोंकोलेनाचाहिएताकिवेसुशासनकायमकरनेमेंअपनीभूमिकानिभासकें।नेताप्रतिपक्ष,राजस्थानविधानसभागुलाबचंदकटारियानेप्रबोधनकार्यक्रमकोएकअच्छीपरिपाटीबतातेहुएकहाकिइसतरहकेसामूहिकविचारविमर्शसेलोकतंत्रकोमजबूतीमिलतीहै।