भगवान राम ने समाज को एक आदर्श जीवन का पाठ सिखाया

संवादसहयोगी,बिलावर:

देवलकेसुक्कातलाकेरघुनाथमंदिरमेंएकलअभियानमेंहोरहीरामकथामेंश्रीहरिसत्संगसमितिजम्मूकेकथावाचकविजयकुमारनेदूसरेदिनकथामेंकईप्रसंगोंकोसुनकारश्रोताओंकोमंत्रमुग्धकिया।उन्होंनेकहाकिमनुष्यकेहरपापखत्महोजातेहैऔरवहइसचौरासीकेचक्करसेराहतप्रकारभगवानकेपरमधामकोजाताहै।लेकिनउसेसत्यकासंगकरनापड़ताहै।चाहेवहप्रभुनामकोअपनेघरमेंहीसच्चेमनसेसुमिरे।यहाउन्होंनेभगवानरामकोमर्यादापुरुषोत्तमबतातेहुएकहाकिउन्होंनेभगवानहोतेहुएभीकभीमर्यादाकोभंगनहींकिया।जिन्होंनेमानवसमाजकोजीनेकीएकउन्नतऔरबहेतरकलादीकिहमलोगोंकोसुखहोयादुखभगवानकासाथकभीनहींछोड़नाचाहिए।तभीमनुष्यकोदुनियामेंयशमिलताहैजबएकदूसरोंकाआदर्शबनताहै।वहीं,उन्होंनेकहाकिद्वापरमेंश्रीकृष्णमर्यादाकेविपरितरहे।उन्होंनेविभिन्नलीलाएंकी।यहाउन्होंनेहरकलाकाप्रयोगकरधरतीसेआसुरीशक्तियोंकोहटाया।