आज पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी साहब की 118वीं जयंती: चरण सिंह की कमी महसूस करते देश के किसान

[केसीत्यागी ]: डॉ.आंबेडकर,सरदारपटेलकेबादपूर्वप्रधानमंत्रीचौधरीचरणसिंहतीसरेऐसेमहापुरुषहैंजिनकेविचारोंकोउनकेजीवनकालमेंउतनीस्वीकार्यताऔरप्रसिद्धीनहींमिलीजितनीउनकेनिधनकेबाद।आजचरणसिंहकीजयंतीहैजिनकीस्मृतिमेंराष्ट्रीयकिसानदिवसमनायाजाताहै।एकऐसेदौरमेंजबदेशमेंकिसानऔरकृषिक्षेत्रतमामसमस्याओंसेजूझरहाहैतबजमीनसेजुड़ेऐसेनेताकास्मरणऔरव्यवस्थामेंउनकेयोगदानकोयादकरनाबहुतजरूरीलगताहै।आजकीग्रामीणबदहाली,उपेक्षा,किसानोंकीआत्महत्याएं,गांवोंसेशहरकीओरबढ़तापलायन,गांव-शहरकेबीचबढ़तीआर्थिक-सामाजिकविषमताएंआदिविषयउनकीराजनीतिकविचारोंकीप्रासंगिकताकोजीवितबनाएहुएहैं।

चरणसिंहनेनागपुरअधिवेशनमेंपंडितनेहरूकीनीतियोंपरकटुप्रहारकियाथा

देशकेविभिन्नभागोंमेंचलरहेकिसानआक्रोशकाकेंद्रबिंदुबनेआंदोलनउनकाजिक्रकिएबगैरअधूरेहीरहतेहैं।एकसमयजबबड़े-बड़ेदिग्गजपंडितनेहरूसेवाद-विवादकरनेसेकतरातेथे,उससमयकांग्रेसकेनागपुरअधिवेशनमेंउन्होंनेपंडितनेहरूकीनीतियोंपरकटुप्रहारकियाऔरसहकारीकृषिकेविषयोंकोलेकरअपनेभाषणमेंअधिकांशकांग्रेसकार्यकर्ताओंसेतालियांभीबटोरीं।उससमयनेहरूकांग्रेसपार्टीकेपर्यायऔरकांग्रेसकेवैचारिकसिद्धांतकारकेरूपमेंजानेजातेथे।कांग्रेसकेभीतरउनकेवैचारिकतिलिस्मकोतोड़नेकायहपहलाप्रयासथा,जिसकीकीमतउन्हेंमंत्रिमंडलसेबाहरहोकरचुकानीपड़ीथी।

यूपीमें‘जोजमीनकोजोते-बोयेवोजमीनकामालिकहै’काक्रियान्वयनचरणसिंहनेकिया

आजादीकेबादकांग्रेसीसरकारोंकेसमक्षअपनेघोषणापत्रोंकोअमलमेंलानेकीभीनैतिकजिम्मेदारीहुआकरतीथी।अधिकांशकार्यक्रमआजादीकेआंदोलनकेदौरानस्वतंत्रभारतकेनिर्माणकेलिएगएसंकल्पथेजिनमेंभूमिसुधारएकमुख्यकार्यक्रमथा।उत्तरप्रदेशमेंउससमयपंडितगोविंदबल्लभपंतमुख्यमंत्रीथेऔरचौ.चरणसिंहउनकेराजस्वमंत्रीथे।ग्रामीणआर्थिकनीति-निर्माताओंकायहमाननाहैकिउत्तरप्रदेशजैसाभूमिसुधारकिसीभीराज्यमेंसंभवनहींहोपाया।वामपंथीऔरसमाजवादीआंदोलनकेइसनारे‘जोजमीनकोजोते-बोयेवोजमीनकामालिकहै’काक्रियान्वयनकरनेकादायित्वभीउन्होंनेनिभाया।

चौधरीसाहबयूपीके प्रथमगैर-कांग्रेसीमुख्यमंत्रीथे, उनकीगिनती कुशलप्रशासक केरूपमेंहोतीहै

डॉ.लोहियाऔरपंडितदीनदयालउपाध्यायगैर-कांग्रेसवादकीजिसराजनीतिकीपटकथातैयारकररहेथे,उनकोउत्तरप्रदेशमेंपरवानचढ़ानेकाकामभीचौधरीसाहबकेजरियेहीसंभवहोसका।वहउत्तरप्रदेशकेप्रथमगैर-कांग्रेसीमुख्यमंत्रीथे।उनकीगिनतीआजभीसबसेप्रभावी,कुशलप्रशासकऔरईमानदारराजनेताकेरूपमेंहोतीहै।

1974मेंराष्ट्रीयराजनीतिमेंप्रवेशकियाऔरनएदलकीरचनाकी

1974मेंउन्होंनेराष्ट्रीयराजनीतिमेंप्रवेशकियाऔरकांग्रेसकेविरोधमेंएकप्रभावीविकल्पकेनिर्माणकीदिशामेंएकनएदलकीरचनाकीजिसमेंभारतीयक्रांतिदलकेसाथ-साथसमाजवादीपार्टी,बीजूजनतादल,स्वतंत्रपार्टीजैसेमहत्वपूर्णदलशामिलहुए।बादमेंजयप्रकाशनारायणकेआंदोलनकेदौरानआपातकालकेबादयहीदलजनतापार्टीकेगठनकीबुनियादभीबना।यहसचहैकिसमाजवादीनेताओंकेसान्निध्यमेंआनेकेबादउन्होंनेस्वयंकोनएरूपमेंभीढालनेकाप्रयासकिया।इसमेंसत्ताविरोधकोप्रभावीबनानेकेलिएजनसंघर्षोंऔरजनआंदोलनोंकीमहतीभूमिकाकोभीउन्होंनेस्वीकारकिया।

राजनीतिमेंप्रभावीदखलसेकिसानोंकेलिएउठाएबड़ेकदम

चौधरीसाहबकेराजनीतिमेंप्रभावीदखलसेपहलेकिसानोंकोन्यूनतमसमर्थनमूल्यजैसीकोईव्यवस्थाअमलमेंनहींथी।केंद्रसरकारमनमानेतरीकेसेकिसानोंकीफसलोंकेदामघोषितकियाकरतीथी।उनकेकार्यकालमेंआढ़तियोंकीभूमिकापरअंकुशलगाऔरकिसानोंकीसहमतिभीआवश्यकबनाईगई।वित्तमंत्रीबननेकेबादउन्होंनेनाबार्डकीव्यवस्थाकीजिससेकिसानोंकोकर्जमिलनेकीप्रक्रियाआसानहुईऔरसूदखोरोंपरलगामलगी।

उनका राष्ट्रीयराजनीतिमें देरीसेहुआ प्रवेश, किसानोंतथापिछड़ोंकेलिएरहेसमर्पित

राष्ट्रीयराजनीतिमेंउनकाप्रवेशदेरीसेहुआजिसकाएकबड़ाकारणउससमयकेकांग्रेसपार्टीकेस्थापितनेतृत्वसेलगातारवैचारिकमतभेदभीरहा।उन्होंनेराजनीतिकेविमर्श,नारोंकोबदला,प्राथमिकताओंकीअदला-बदलीपरजोरदियाऔरडॉ.आंबेडकरकेबादकिसानोंतथापिछड़ोंकीराजकाजमेंहिस्सेदारीसेजुड़ेसवालउठाया।

किसानोंकेलिए50फीसदऔरपिछडे़वर्गोंकेलिएभीआरक्षणकीमांगउठाई

1937मेंहीउन्होंनेउत्तरप्रदेशकांग्रेसकमेटीकेप्रांतीयसम्मेलनमेंपहलीबारकिसानोंकेलिए50फीसदआरक्षणकीमांगकामुद्दाउठाकरकांग्रेसनेतृत्वकोअचंभितभीकरदियाथा।उसदौरमेंग्रामीणपृष्ठभूमिऔरखासतौरपरकिसानसमूहोंकीहिस्सेदारीनकेबराबरथी।बादमेंउन्होंनेसामाजिक-शैक्षणिकतौरपरपिछडे़वर्गोंकेआरक्षणकीमांगउठाई।

उन्हींकेप्रयासोंसेमंडलआयोगकागठनकियागया

काकाकालेलकरआयोगकीसिफारिशेंठंडेबस्तेमेंकैदथींऔरपरिवर्तनतथाभागीदारीकेलिएबेचैनइनसमूहोंकानिरंतरसंघर्षजारीथा।उन्हींकेप्रयासोंसेमंडलआयोगकागठनकियागयाजिसमेंपिछड़ेवर्गकेसमूहोंकेलिएभीआरक्षणकीव्यवस्थाकाप्रावधानथा।इन्हींसवालोंकीप्रखरताकेकारणपार्टीमेंविवादभीबढ़ेऔरसमाजकेअभिजात्यवर्गकेद्वाराउन्हेंजातिवादीनेताकेरूपमेंबदनामकरनेकाअभियानभीचलायागया।

आजहरदलपिछड़ेवर्गोंकीभागीदारीकोलेकरलालायतरहताहै

ऐसेमहापुरुषोंकीराजनीतिकविचारधारासमयकालकीभीप्रतीक्षामेंरहतीहै।आजकोईदलपिछड़ेवर्गोंकीसाझेदारीऔरभागीदारीकोअपनीपार्टीकाकार्यक्रमबनानेमेंगर्वमहसूसकरताहै।सभीदलोंकेघोषणापत्रवंचितसमूहोंकेआरक्षणलागूकरनेकेसंकल्पकेसाथप्रारंभहोतेहैं।धीरे-धीरेदलोंकेनेतृत्वमेंभीइनसमूहोंकीहिस्सेदारीकीझलकस्पष्टदिखतीहै।

आजचौधरीचरणसिंहकी 118वींजयंतीहै

आजहमचौधरीसाहबकी118वींजयंतीपरउनकास्मरणकररहेहैं।उन्होंनेजिनसवालोंकोआवाजदीउसकेस्वरमद्धमनपड़जाएं,इसकेलिएहमेंअनवरतरूपसेजागरूकरहनेकीजरूरतहै।किसानआत्महत्याकेमामलोंमेंबढ़ोतरीहुईहै।खेतीमुनाफेकासौदानहींबचीहै।गांवमहानगरोंकेउपनिवेशबनचुकेहैं।कृषिपरबढ़तेबोझकोअन्यगैर-कृषिकार्योंमेंलगानेकासिलसिलाबंदहै।पिछड़ेवर्गोंकेलिएआरक्षणकीव्यवस्थालागूहै,लेकिनउच्चनौकरियोंएवंशिक्षणसंस्थानोंमेंउनकीउपस्थितिठीकसेदर्जनहींहोपारहीहै।

आजएकऔरचौ.चरणसिंहकीआवश्यकतामहसूसहोरहीहै

राजनीतिमेंशुचिताऔरईमानदारीउनकेव्यक्तित्वकेगुणथेजोआजउनकेसमर्थकोंकीकार्यशैलीसेलुप्तहोगएहैं।इसलिएआजएकऔरचौ.चरणसिंहकीआवश्यकताअबमहसूसहोरहीहैजोउसीप्रखरता,तत्परता,व्यग्रता,कुशलताकेसाथउनकार्यक्रमोंकोअमलीजामापहनासके।

(लेखकजदयूकेराष्ट्रीयप्रवक्ताहैैं)